भारत में इंजीनियरिंग की चौंकाने वाली वास्तविकता | एक इंजीनियर बनने से पहले ये पढ़ लें

देश में इंजीनियरिंग की चौंकाने वाली वास्तविकता

भारत में, एक करियर के रूप में इंजीनियरिंग ने बहुत से छात्रों को बड़े पैमाने पर आकर्षित किया है और इंजीनियरिंग परीक्षा लेने वाले इच्छुक उम्मीदवारों की बड़ी संख्या इस तथ्य की गवाही है। भारत में युवा खुद को एक अच्‍छा पैकेज कमाते हुए इंजीनियर के रूप में सपने देखते हैं।

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https://youtu.be/YUU23NZXSjU

देश में इस समय तकनीकी और उच्च शिक्षा सबसे बुरे दौर में है। पिछले पांच साल से उच्च शिक्षा का समूचा ढांचा चरमरा गया, लेकिन किसी सरकार ने इसके लिए कुछ नहीं किया। यूपीए के शासनकाल में 2010 से तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता की नीव कमजोर होनें लगी थी और देश भर में इंजीनियरिंग सहित कई तकनीकी कोर्सों में लाखों सीटें खाली रहने लगी थी, जिसका आंकड़ा साल दर साल बढ़ता गया, लेकिन केंद्र सरकार ने इतने संवेदनशील मुद्दे पर कुछ नहीं किया।

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पिछले एक साल से एनडीए सरकार ने भी इस स्थिति से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। हालात यह यह है वर्तमान सत्र में पूरे देश में तकनीकी और उच्च शिक्षा में 7 लाख से ज्यादा सीटें खाली है। कहने का मतलब यह कि साल दर साल स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। तकनीकी और इंजीनियरिंग स्नातकों में बेरोगारी लगातार बढ़ रही है।

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सरकार का सारा ध्यान सिर्फ कुछ सरकारी यूनिवर्सिटीज, आईआईटी, आईआईएम् ,एनआईटी जैसे मुट्ठीभर सरकारी संस्थानों पर है। जबकि देश भर में 95% युवा निजी विश्वविद्यालयों और संस्थानों से शिक्षा लेकर निकलते हैं और सीधी सी बात है, अगर इन 95% छात्रों पर कोई संकट होगा तो वो पूरे देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक स्थिति को भी नुकसान पहुंचाएगा। सिर्फ 5% सरकारी संस्थानों की बदौलत विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता।

हर साल, आईआईटी जैसे संस्थानों के लिए प्रवेश परीक्षा में लाखों छात्र उपस्थित होते हैं लेकिन उनमें से कुछ ही परीक्षा को पास करने में कामयाब होते हैं। वे छात्र जो आईआईटीयन बनने के अपने सपने को पूरा करने में असमर्थ हैं – या तो वे दूसरी बार तैयारी करना शुरू करते हैं या वे निजी कॉलेजों के दरवाजे पर दस्तक देते हैं। लेकिन अपने जीवन से महत्वपूर्ण समय समर्पित करने के बाद, क्या वे वास्तव में कुशल इंजीनियरों बन जाते हैं या उनके इंजीनियरिंग कौशल उनके प्रमाण पत्र तक सीमित हैं?

aspiring minds द्वारा किए गए सर्वेक्षण के चौंकाने वाले परिणामों के कारण आज ये प्रश्न उठा हैं, जिसमें पता चला है कि भारत में केवल 7% इंजीनियरिंग स्नातक नौकरी करने लायक हैं। भारत के इंजीनियरों के साथ क्या गलत है? इसी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में केवल 3% इंजीनियरों के पास इंजीनियरिंग के मुख्य क्षेत्रों में नौकरी पाने के लिए उपयुक्त कौशल हैं। भारत में लगभग 1.5 मिलियन इंजीनियरों को हर साल विभिन्न कॉलेजों से रिहा किया जाता है लेकिन उनमें से अधिकतर में नौकरी करने के लिए आवश्यक कौशल नहीं होते हैं।

लेकिन इसके पीछे प्रासंगिक कारण क्या हो सकते हैं? इसमें कोई संदेह नहीं है कि रिपोर्ट स्पष्ट रूप से आवश्यक कौशल की कमी को इंगित करती है जो बाजार इन स्नातकों से अपेक्षा करता है। Tier-3 कॉलेज का स्तर तो और भी खराब हैं।

आइए सबसे पहले कॉलेजों को वर्गीकृत करने के आधार को समझें।

Tier-1: इसमें IITs NITs और IIITs जैसे शीर्ष केंद्रीय कॉलेज शामिल हैं।

Tier-2: इसमें शीर्ष रैंकिंग निजी संस्थान विश्‍वविघालय और अन्य सभी राज्य प्रायोजित सरकारी कॉलेज शामिल हैं, जैसे REC, GITAM, SRM, Nirma इत्यादि।

Tier-3: इसमें उन सभी शेष कॉलेज शामिल हैं जो निजी संस्थान हैं लेकिन विशेष रूप से वर्गीकृत नहीं हैं।

यहां, Tier-2 और Tier-3 कॉलेजों पर इस विश्लेषण को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि देश भर में उनकी मौजूदगी Tier-1 कॉलेजों की तुलना में बड़ी संख्या में है। भारत में इन कॉलेजों से अधिकांश इंजीनियरिंग स्नातक निकलते है।

कम मांग और अधिक आपूर्ति का समीकरण बेरोजगारी के पीछे कारणों में से एक हो सकता है लेकिन इससे भी अधिक, वास्तविक कारण मांग बनाम गुणवत्ता है।

हां, पिछले कुछ सालों में, इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या पहले कभी नहीं बढ़ी है। इसके परिणामस्वरूप अधिक आपूर्ति हुई है, लेकिन इसके बावजूद, शिक्षा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है जिससे इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए उपयुक्त नौकरी हासिल करना मुश्किल हो जाता है।

भारत में, एक छात्र को अक्सर अपने जीवन में तीन गलतियों को माना जाता है। सबसे पहले, वे अध्ययन में बहुत अच्छे हैं। दूसरा, वे गणित में अच्छे हैं। तीसरा, पहली दो गलतियों को जानने के बाद, वे इंजीनियरिंग को एकमात्र विकल्प के रूप में चुनते हैं।

ऐसे कुछ छात्र हैं जो वास्तव में इंजीनियरिंग में दिलचस्पी रखते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो अनिच्छुक रूप से इसे अपना जुनून बनाते हैं। इसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में नए कौशल सीखने में रुचि की कमी है। कुछ लोग बाजार में उन्हें एक विश्वसनीय खिलाड़ी बनाने के लिए भी इस करियर का चयन करते हैं, ताकि वे अपने विवाह के दौरान भारी मात्रा में दहेज प्राप्त कर सकें। हालांकि हमें सभी एक ही लेंस के माध्यम से नहीं देखना चाहिए क्योंकि भारत में, लोग अपने पेशे को अपने जुनून में बदलने में अच्छे हैं।

लेकिन केवल उन छात्रों को दोषी ठहराते हैं जिनके पास आवश्यक कौशल नहीं है, वे निष्पक्ष नहीं होंगे क्योंकि ज़िम्मेदारी हमेशा जवाबदेही के साथ काम करती है और ज़िम्मेदारी के साथ जिम्मेदारिता भी तय की जानी चाहिए।

इसके द्वारा, मेरा मतलब भारत में कॉलेजों और शिक्षा प्रणाली की जवाबदेही है। यदि बाजार स्नातक से व्यावहारिक कौशल की मांग करता है, तो इंजीनियरिंग कॉलेज अभी भी व्यावहारिकता के बजाय सिद्धांत पर अधिक ध्यान केंद्रित क्यों कर रहे हैं?

इंजीनियरिंग के क्षेत्र को नौकरी उन्मुख माना जाता है, जिसका अर्थ है कि इस क्षेत्र में अध्ययन करने वाले किसी भी व्यक्ति को पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद सीधे विभिन्न कंपनियों में मिल ही जाती है।

लेकिन आज, अगर किसी तरह एक स्नातक को कंपनी में रखा जाता है, तो कंपनी को उन्हें प्रशिक्षण अवधि में कौशल सिखाने की जरूरत होती है क्योंकि उन्होंने कॉलेज के दौरान आवश्यक कौशल हासिल नहीं होता।

पाठ्यक्रम तैयार करने में उनकी खामियों के कारण वर्तमान शिक्षा प्रणाली इस परिणाम के लिए उत्तरदायी है। आज, इंजीनियरिंग में छात्रों को उन विषयों का अध्ययन करने के लिए मजबूर किया जाता है जिनका उद्योग में कोई उपयोग नहीं है। खुले ऐच्छिक विषयों के लिए एक विकल्प की कमी है जो छात्रों को उन विषयों को आगे बढ़ाने की अनुमति देगी जो उन्हें रूचि देते हैं।

इससे पहले, इंजीनियरिंग छात्रों की गुणवत्ता अच्छी थी क्योंकि इस पाठ्यक्रम की पेशकश करने वाले कुछ कॉलेज थे और वह भी तभी होगा जब आप योग्य थे। लेकिन समय के साथ, इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ी, Tier-2 और Tier-3 कॉलेजों की अवधारणा को पेश किया। यह उम्मीदवारों को उनके लिए बेहतर नौकरियों को आश्वस्त करके पैसे कमाने के लिए एक platform बन गया लेकिन धीरे-धीरे, इस तरह केम्‍पस के नाम पर आश्वासन ही रह गए। नीचे दिया गया ग्राफ दिखाता है कि भारत में 2008(जब मेेंने BE की) से कितनी संख्या मेें इंजीनियरिंग कॉलेजों में वृद्धि हुई है।

AICTE Source

Source: AICTE Handbook 2016

उच्च शिक्षा में जो मौजूदा संकट है, उसे समझनें के लिए सबसे पहले इसकी संरचना को समझना होगा। मसलन एक तरफ सरकारी संस्थान है दूसरी तरफ निजी संस्थान और विश्वविद्यालय हैं। निजी संस्थानों भी दो तरह के हैं, एक वो हैं जो छात्रों को डिग्री के साथ साथ हुनर भी देते है जिससे वो रोजगार प्राप्त कर सकें। ये संस्थान गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है और उसके लिए लगातार प्रयास कर रहें है, ये छात्रों के स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देते हुए उन्हें उच्च स्तर की ट्रेनिंग मुहैया करा रहें है।

वहीं दूसरी तरफ कई प्राइवेट यूनिवर्सिटी और संस्थान सिर्फ डिग्री देनें की दूकान बन कर रह गए हैं। ये खुद न कुछ अच्छा करतें है बल्कि जो भी संस्थान बेहतर काम करनें की कोशिश करता है, उसके खिलाफ काम करने लगते हैं, साथ में कुछ अच्छे संस्थानों और विश्वविद्यालयों को बेवजह और झूठे तरीके से बदनाम करने की भी कोशिश की जाती है और इस काम में कई बार मीडिया का सहारा लेकर कई गलत ख़बरें और गलत तथ्य प्लांट किए जाते हैं, जो की पेड़ मीडिया का एक हिस्सा है। जबकि सच्चाई यह है कि पिछले पांच सालों में उच्च और तकनीकी शिक्षा में छाई इतनी मंदी के बाद भी इन संस्थानों और यूनीवर्सिटीज में पर्याप्त संख्या में छात्र हैं। एक तरह जहां देश के अधिकांश संस्थानों में लाखों की संख्या में सीटें खाली है, वहीं दूसरी तरह इनकी सीटें भरी हुई हैं। इसी से पता चलता है कि ये गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसकी वजह से छात्र इनकी तरफ आकर्षित हो रहें है!

अधिकांश निजी संस्थान उच्च शिक्षा में छाई मंदी से इस कदर हताश और निराश हो चुके हैं कि अब वो कुछ नया नहीं करना चाहते, न ही उनके पास छात्रों को स्किल्ड बनाने की कोई कार्य योजना है। दूसरी तरफ जो संस्थान अच्छी और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और स्किल ट्रेनिंग देने की कोशिश कर रहें हैं, उन्हें नियम कानून का पाठ पढ़ाया जा रहा है। उन्हें तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है, मतलब वो स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रहें है। कहने का मतलब यह कि जो संस्थान देश हित में छात्र हित में कुछ इनोवेटिव फैसले ले रहे हैं, वो सरकारी लाल फीताशाही का शिकार हो रहे हैं। कुल मिलाकर यह स्थिति बदलनी चाहिए। दशकों पुराने क़ानून बदलने चाहिए।

इसी आशा के साथ कि आप इन तथ्‍यों से जान पाएगें कि आपको अब क्‍या करना हैं। आशा है कि ऊपर दिए गयी जानकारी से आप इंजीनियरिंग कॅ‍रियर के बारे में काफी समझ गए होगें. अगर आपका कोई भी Question हो तो हमारे साथ comments के ज़रिये ज़रूर share कीजिये इस post को पढने के लिए आपका धन्यवाद इस post के video संस्‍करण के लिए, नीचे हमारे यूट्यूब चैनल पर जाकर देख सकते है।

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